China Aur Taiwan Vivad Kya Hai -चीन ताइवान विवाद क्या है

भारत के पड़ोसी देश चाइना के द्वारा वन चीन पॉलिसी का स्वीकृति दी जा रही है। इस पॉलिसी के तहत चाइना का यह मानना है कि ताइवान उसके ही देश का एक मुख्य हिस्सा है परंतु दूसरी तरफ ताइवान का कहना यह है China Aur Taiwan Vivad Kya Hai कि वह अपने आप को एक संप्रभु देश मानता है और यही कारण है कि पिछले 73 सालों से चाइना और ताइवान के बीच विवाद चल रही है।

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इन दोनों देशों के बीच में मुख्य बात यह है कि इन देशों के बीच की केवल दुरी 100 मील है। ताइवान देश दक्षिण पूर्वी चाइना के टीला से बहुत पास है China Aur Taiwan Vivad Kya Hai और इसी कारण से कई बार यह खबरें आई हैं कि ताइवान और चाइना में टकराव हुआ है। और चाइना के द्वारा लगातार ताइवान की समुद्री सीमा में भी ग़ैरक़ानूनी तौर पर घुसपैठ की जाती है क्योंकि चीन का यह कहना है कि वह नहीं चाहता है कि कोई दूसरा देश इस मामले में प्रतिबद्धता करें ।

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चीन-ताइवान विवाद का इतिहास

1895 के के दौर में जापान काफी शक्तिशाली देश था और इसी समय चाइना में चिंग राजवंश के द्वारा शासन किया जा रहा था,और यह बहुत ही कमजोर था। इसी बात का फायदा उठाते हुए चाइना पर भयंकर हमला जापान के द्वारा किया गया और जापान द्वारा चाइना के बड़े बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया गया और यही इलाका बाद में कोरिया और ताइवान बना।

China Aur Taiwan Vivad Kya Hai इस प्रकार से चाइना और जापान के बीच जो युद्ध हुआ था उसे चीन-जापान युद्ध का नाम दिया गया। इसके बाद अमेरिका के द्वारा आगे बढ़ते हुए साल 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहर पर परमाणु हमला किया गया, जिसकी वजह से जापान को काफी हानि पहुंची।

और इस नुकसान की भरपाई करने के लिए जापान को काफी समय लगा और जापान जब कमजोर हो गया तो उसी समय कोरिया और ताइवान, जापान के अधिकार क्षेत्र से बाहर निकल गया। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai इसके बाद ताइवान ने अपने आप को स्वतंत्र देश घोषित कर दिया।

इस प्रकार पिछले काफी लंबे समय से चीन की कम्युनिस्ट सरकार के द्वारा ताइवान को अपना हिस्सा बताया जाता है और यही कारण है कि चीन लगातार ताइवान को अपने कंट्रोल में लेने के प्रयास में लगा हुआ है। China Aur Taiwan Vivad Kya Ha और परंतु ताइवान ऐसा करने के लिए राजी नहीं है। वह अपने आप को स्वतंत्र देश ही मानता है और वह चाइना के अधिकार क्षेत्र में नहीं आना चाहता है।

चीन की वन चाइना पॉलिसी क्या है?

आखिर चीन के द्वारा ताइवान को अपने देश का हिस्सा बनाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है इसके बारे में जानने के लिए हमें चाइना देश के द्वारा अपनाई गई वन चाइना पॉलिसी के बारे में जानना होगा।

तो साल 1949 में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना पार्टी के द्वारा वन चाइना पॉलिसी का निर्माण किया गया था। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai और इस पॉलिसी के तहत चाइना ने ताइवान को अपना हिस्सा माना, साथ ही चाइना का अन्य जिस किसी भी देश के साथ विवाद है ।

उस देश को भी चीन ने अपना हिस्सा माना और कई बार इंटरनेशनल लेवल पर भी चीन ने अपनी इस बात को काफी गंभीरता से रखा। बता दें कि चाइना की वन चाइना पॉलिसी के तहत मैनलैंड चीन और हांगकांग मकाउ जैसे दो प्रशासित इलाके भी आते हैं।

अमेरिका और अन्य देश क्यों दे रहे हैं ताइवान का साथ

ताइवान में पढ़े लिखे लोगों की जनसँख्या अत्यधिक है। इसके लिए ताइवान को बुद्धिमान का देश कहा जाता है। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai हालांकि भले ही ताइवान में आबादी कम है परंतु टेक्नोलॉजी के मामले में ताइवान पिछले काफी लंबे समय से लगातार आगे ही बढ़ता जा रहा है।

चिप बनाने के मामले में दुनिया में ताइवान देश का पहला नंबर पर आता है।इसके अलावा इस देश में महंगे से महंगे लैपटॉप के अलावा महंगे स्मार्टफोन और घड़ी का भी निर्माण होता है। और दुनियाभर में जितनी चिप की बिक्री होती है उसमें से आधे चिप के ब्रांड ताइवान देश के ही होते हैं ।

साथ ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों से लेकर के स्मार्टफोन, लैपटॉप और जहाज से लेकर के सेटेलाइट तक में जो चिप इस्तेमाल होती है उसके लिए सारा संसार ताइवान पर ही निर्भर है। इसलिए अमेरिका और अन्य दूसरे देशों के द्वारा ताइवान को सुस्पष्टता दी जा रही है।

चीन-ताइवान युद्ध का भारत और दुनिया पर असर

इंडिया में मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या 70 करोड़ के आसपास में हैं और तकरीबन 20 करोड़ की आबादी ऐसी है जो कार और लैपटॉप का इस्तेमाल करती हैं। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai इस प्रकार से अगर ताइवान और चाइना के बीच लड़ाई हो जाती है।

तो इंडिया के अलावा देशभर में ऑटोमोबाइल, लैपटॉप और मोबाइल महंगे हो जाएंगे, साथ ही कई कंपनी बंद होने की टीला पर भी पहुंच जाएंगी। इसके पीछे की यह वजह है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में जो चिप इस्तेमाल की जाती है या फिर जो सेमीकंडक्टर इस्तेमाल होता है।

China Aur Taiwan Vivad Kya Hai उसका रचना ताइवान ही होता है और दुनिया भर में सेमीकंडक्टर को बेचने के पश्चात जो कुल कमाई होती है, उसका लगभग 54% ताइवान की कंपनी को ही मिलता है। इस प्रकार अगर ताइवान में चिप और सेमीकंडक्टर का प्रोडक्शन बंद होता है।

तो इसकी वजह से दुनियाभर की कंपनी पर असर पड़ेगा और इलेक्ट्रॉनिक चीजें भी महंगी होंगी। विभिन्न कंपनियों के द्वारा ताइवान से लिया जाता है China Aur Taiwan Vivad Kya Hai सेमीकंडक्टर ताइवान की टीएसएमसी कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनी है।

और एप्पल कॉल कम, माइक्रोसॉफ्ट, सोनी, आसुस, यामहा, पैनासोनिक, जैसी कंपनी टीएसएमसी कंपनी की बड़ी कस्टमर है। ताइवान की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी वर्ल्ड का 90 प्रतिशत एडवांस सेमीकंडक्टर का प्रोडक्शन करती हैं। सेमीकंडक्टर के मामले में चाइना ताइवान से पीछे हैं।

चीन और ताइवान की सैन्य ताकत

चाइना के सभी प्रकार के सैनिकों को देखा जाए तो लगभग चाइना में 20,35000 एक्टिव सैनिक हैं वहीं ताइवान के पास केवल 1,63000 एक्टिव सैनिक उपस्थित है। ताइवान की आर्मी में 88000 थल सेना के जवान, 4000 नौ सेना के जवान और 35000 वायु सेना के जवान है।

चीन के पास 9,65000 थल सेना के जवान हैं। 2,60000 नौसेना के जवान है और 4,14000 वायु सेना के जवान हैं। अगर एक्सपर्ट के अनुसार देखा जाए तो ताइवान अगर अपनी पूरी शक्ति के साथ चीन से लड़ता है तो भी वह चीन के हमलो को सिर्फ कम ही कर सकेगा परंतु वह लंबे समय तक चाइना के सामने नहीं टिक पाएगा।

चीन के सामने नहीं टिक पाएगा ताइवान

चाइनीस आर्मी के पास टोटल 3285 एयरक्राफ्ट उपस्थित है और ताइवान के पास 741 एयरक्राफ्ट उपस्थित है। चाइनीस आर्मी के पास 1200 लड़ाकू हवाई जहाज है और ताइवान के पास 288 लड़ाकू हवाई जहाज है। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai चाइना के पास 912 हेलीकॉप्टर हैं जिनमें से 91 अटैक हेलीकॉप्टर हैं।

इसके अलावा 5250 टैंक, 35000 बकतरबंद गाड़ी और 4120 self-propelled आर्टिलरी है। ताइवान के पास सिर्फ 1110 टैंक, 257 self-propelled तोप है। इस प्रकार से देखा जाए तो अगर चाइना और ताइवान के बीच युद्ध होता है तो कुछ ही दिनों में ताइवान घुटने पर आ जाएगा।

चाइना और ताइवान के बीच क्या संबंध है?

ताइवान एक ऐसा द्वीप है जो साल 1950 से ही स्वतंत्र है परंतु चीन देश के द्वारा ताइवान को अपना विद्रोही राज्य माना जाता है। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai और इस प्रकार एक तरफ जहां ताइवान अपने आप को संप्रभु राष्ट्र और स्वतंत्र राष्ट्र मानता है।

वही चीन देश का ऐसा मानना है कि ताइवान को चीन में शामिल होना चाहिए और इसके लिए भले ही चाइनीस गवर्नमेंट को सैनिक पावर का इस्तेमाल क्यों ना करना पड़े।

चीन और ताइवान में कितनी दूरी है?

चीन और ताइवान के बीच की दूरी सिर्फ 100 मील है। हालांकि इसके बावजूद चीन ताइवान पर हमला करने से पहले सौ बार सोचेगा क्योंकि चीन के चारों तरफ दूसरे देशों की सीमाएं हैं, वहीं ताइवान एक टापू है।

China Aur Taiwan Vivad Kya Hai इसके अलावा ताइवान को अमेरिका का सपोर्ट भी मिल रहा है। चीन अपनी सारी सेना को ताइवान के पीछे नहीं लगा सकता है, क्योंकि चीन के अगल-बगल कई देशों की सीमाएं लगती हैं। इसीलिए यह देखना जरुरी रहेगा कि चीन अब ताइवान कारण पर क्या रुख अपनाता है।

आखिर क्यों दूसरा यूक्रेन बन सकता है ताइवान

यूक्रेन के ऊपर जिस प्रकार से रसिया के द्वारा दावा किया जाता है China Aur Taiwan Vivad Kya Hai उसी प्रकार ताइवान पर भी चीन के द्वारा दावा किया जाता है पर यह यूक्रेन का झगड़ा अमेरिका की तरफ था। इसीलिए रूस को यह बात नागवार गुजरी और उसने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया।

इसी प्रकार ताइवान का झगड़ा भी अमेरिका की तरफ हीं है और चीनी सरकार के भारी विरोध के बावजूद अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी के द्वारा जब ताइवान की यात्रा की गई तो चीन भड़क उठा। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai इस प्रकार यह अंदेशा जताया जा रहा है कि अगर चीन के द्वारा ताइवान पर आक्रमण किया जाता है तो ताइवान भी अगला यूक्रेन बन सकता है।

कभी चीन का हिस्सा था ताइवान

ताइवान पहले चीन का अहम हिस्सा था. China Aur Taiwan Vivad Kya Hai दोनों देशों के बीच काफी समय तक युद्ध चला। 1644 के दौरान जब चीन में चिंग वंश का शासन तो ताइवान उसी के हिस्से में था। 1895 में चीन ने ताइवान को जापान को सौंप दिया। इसी के बाद से दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया।

1949 में चीन में गृहयुद्ध हुआ तो माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कॉमिंगतांग पार्टी को हरा दिया. इसके बाद कॉमिंगतांग पार्टी ताइवान पहुंच गई और वहां जाकर अपनी सरकार बना ली.। दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की हार हुई तो उसने कॉमिंगतांग को ताइवान का नियंत्रण सौंप दिया।

China Aur Taiwan Vivad Kya Hai इसके बाद से ताइवान में चुनी हुई सरकार बन रही है. वहां का अपना संविधान भी है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ताइवान को अपने देश का हिस्सा बताती है. चीन इस द्वीप को फिर से अपने नियंत्रण में लेना चाहता है।

चीन की वन चाइना पॉलिसी क्या है?

ताइवान को लेकर चीन इतना बेचैन क्यों है, इसके लिए पहले चीन की वन चाइना पॉलिसी को समझना होगा. 1949 में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) ने वन चाइना पॉलिसी बनाई। इसमें ना सिर्फ ताइवान को चीन का हिस्सा माना गया बल्कि जिन जगहों को लेकर उसके अन्य देशों के साथ टकराहट थे।

China Aur Taiwan Vivad Kya Hai उन्हें भी चीन का हिस्सा मानते हुए अलग पॉलिसी बना थी। अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन इन हिस्सों को प्रवाह से अपना बताता रहा है। इस पॉलिसी के तहत मेनलैंड चीन और हांगकांग-मकाऊ जैसे दो विशेष रूप से शासित क्षेत्र भी आते हैं।

नैंसी की ताइवान यात्रा पर भड़का चीन

नैंसी की ताइवान यात्रा से चीन काफी भड़का हुआ है कि इस द्वीप के चारों तरफ पानी और आसमान में अच्छा प्रशिक्षण कर, चेतावनी दे रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) पहले ही कह चुके हैं कि वह ताइवान को बल पूर्वक भी चीन का हिस्सा बना सकते हैं।

वहीं नैंसी पेलोसी ने बुधवार को ताइवान की यात्रा के दौरान चीन को संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका, ताइवान को अकेला नहीं छोड़ेगा। अमेरिका हर परिस्थिति में ताइवान के साथ है।

वास्तविक चीन में असली सरकार किसकी?

ताइवान का आधिकारिक नाम, रिपब्लिक ऑफ चाइना है। करीब सौ साल पहले मौजूदा चीन को इसी नाम से जाना जाता था। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai चीन में 1644 में चिंग वंश, जिसे क्विंग वंश भी कहा जाता है का शासन था। वर्ष 1911 में चीन में चिन्हाय क्रांति हुई,

जिसमें चिंग वंश सत्ता से बेदखल हो गया। इसके बाद राष्ट्रवादी क्यूओमिनटैंग पार्टी या कॉमिंगतांग पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच चीन की सत्ता पर काबिज होने का झगड़ा शुरू हुआ।

आखिरकार कॉमिंगतांग पार्टी सरकार बनाने में कामयाब हुई और उसने चीन का आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ चाइना रखा। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai यहीं से दोनों राजनीतिक दलों के बीच झगड़े की शुरूआत हो चुकी थी।

73 वर्ष पहले गृहयुद्ध में बना ताइवान

करीब 73 वर्ष पहले वर्ष 1949 में कम्युनिस्ट पार्टी ने एक बार फिर माओत्से तुंग के नेतृत्व में देश की कॉमिंगतांग सरकार के विरोध विद्रोह शुरू कर दिया। इस विद्रोह गृहयुद्ध का रूप ले लिया। इसमें कॉमिंगतांग पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और उसके बचे हुए लोगों ने ताइवान वाले हिस्से में जाकर मातहत ली।

इस द्वीप पर कॉमिंगतांग पार्टी के लोगों ने अपनी अलग सरकार बनाकर, इसका आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ चाइना रख दिया, जो पहले चीन का नाम हुआ करता था। तब तक चीन की भूमि पर काबिज कम्युनिस्ट सरकार उसका नाम बदलकर रिपब्लिक ऑफ चाइना कर चुकी थी।

दोनों तरफ के लोग चीन और ताइवान को एक मानते हैं और दोनों तरफ की सरकारें पूरे चीन का राजनीतिक प्रतिनिधित्व करने का दावा करती हैं। यही वजह है कि दोनों तरफ की सरकारें एक-दूसरे की भूमि पर अपने हक का दावा करती रहती हैं।

China Aur Taiwan Vivad Kya Hai ताइवान क्षेत्रफल, सैन्यबल और अन्य संसाधनों के मामले में चीन से काफी पीछे है, लिहाजा ड्रैगन वक्त-वक्त पर अपनी मनमानी करता रहता है।

ड्रैगन की वन चाइना पॉलिसी

ताइवान पर अपना हक जताने वाले चीन ने इसी उद्देश्य से ‘वन चाइना पॉलिसी’ तैयार की है। इसका मतलब है कि चीन एक ही, जिसका शासन शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी करती है। अगर किसी देश को चीन या ताइवान से राजनयिक संबंध रखने हैं, तो उसके लिए शि जिनपिंग के साथ ही समझौता करना पड़ेगा।

China Aur Taiwan Vivad Kya Hai वन चाइना पॉलिसी के तहत चीन से राजनयिक संबंध रखने वाले देश को ताइवान सरकार से अपने संबंध खत्म करने होंगे। एक-दूसरे की जमीन पर अपना-अपना दावा और वन चाइना पॉलिसी, चीन व ताइवान के बीच विवाद की मुख्य वजह है।

चीन को अमेरिका ने वर्षों तक नहीं दी थी मान्यता

चीन की मुख्य भूमि पर कम्युनिस्ट सरकार की सत्ता थी, बावजूद अमेरिका ने कई वर्षों तक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को अलग देश के तौर पर मान्यता नहीं दी थी। इसकी जगह अमेरिका, ताइवान की सरकार को ही वास्तविक चीनी सरकार का दर्जा देता था।

चीन ने वर्ष 1950 में ताइवान के कुछ बाहरी इलाकों पर हमला किया था, जिसका जवाब देने के लिए अमेरिका ने ताइवान के समर्थन में अपने जहाज भेज दिए थे। वर्ष 1976 तक यही स्थिति बनी रही।

अमेरिका ने चीन को मान्यता दी, लेकिन ताइवान से संबंध नहीं तोड़ा

1976 में समाज सुधारक डेंग जिआओपिंग ने चीन की सत्ता संभाली। उनके विचारों से प्रभावित हो तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर, चीन को मान्यता देने और संबंध स्थापित करने को तैयार हो गए। वर्ष 1979 में मौजूदा चीन और अमेरिका के बीच समझौता हुआ, जिसमें जिमी कार्टर ने वन चाइन पॉलिसी को स्वीकार कर लिया।

इस समझौते के बाद अमेरिकी सरकार ने एक कानून पास किया। China Aur Taiwan Vivad Kya Hai इस कानून में तय किया गया कि अमेरिका, ताइवान को उसकी रक्षा के लिए हथियार उपलब्ध कराता रहेगा। लिहाजा वन चाइना पॉलिसी परिग्रह के बावजूद,अमेरिका के ताइवान से अनौपचारिक संबंध बने रहे। इसीलिए चीन, अमेरिका से भी चिढ़ता है।

ताइवान पर जापान का कब्जा

1894 में चीन के क्विंग राजवंश और जापानी साम्राज्य के बीच युद्ध हुआ, जिसे पहला सीनो-जापान युद्ध भी कहा जाता है। इसके बाद 1895 में हुए एक समझौते के तहत ताइवान पर जापान ने कब्जा जमा लिया।

और जापान ने इस द्वीप पर करीब 50 वर्ष तक (1945 तक) राज किया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान चीन ने इस द्वीप पर दोबारा अपना कब्जा जमा लिया। इसके बाद यहां के दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच शुरू हुई सत्ता की जंग ने इस द्वीप को अलग देश ताइवान बना दिया।

चीन और ताइवान के बीच अगर युद्ध हुआ तो क्या होगा

इस हफ़्ते चीन के पांच लड़ाकू विमानों ने एक बार फिर ताइवान की सीमा में घुसपैठ की. चीन के लड़ाकू विमानों ने पिछले साल रिकॉर्ड बनाने के बाद इस साल महज एक पखवाड़े में नौ बार ताइवान की हवाई सीमा में घुसपैठ कर ली है. घुसपैठ की इन घटनाओं से चीन और ताइवान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसकी असली वजह ताइवान को ‘चीन में मिलाने’ का लक्ष्य है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि “ताइवान के साथ चीन का फिर से एकरूप ज़रूर होगा.”उन्होंने यह लक्ष्य पाने के लिए ताक़त का इस्तेमाल करने की संभावनाओं को अस्वीकृत नहीं किया.

FAQ :

चीन और ताइवान में से कौन ज्यादा ताकतवर है?

चीन

चीन और ताइवान विवाद का कारण क्या है?

चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता है।

चीन और ताइवान विवाद में दुनिया के देश किसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं?

ताइवान

ताइवान किस मामले में नंबर वन है?

चिप, सेमीकंडक्टर का निर्माण करने में

चीन ताइवान युद्ध से विश्व पर क्या असर होगा?

इलेक्ट्रॉनिक चीजें महंगी होगी।

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